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Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • ऐसे ही क्यों होता हैं? - 1

    लेखक: एसटीडी मौर्य️,कटनी मध्य प्रदेश मोबाइल नंबर -7648959825​एक दिन मैं लिख रहा...

  • मैं हो रहा हूॅं

    कहते है जीवित बचे रहना बहुत बड़ी बात है पर कोई ये नहीं जानता उसकी भी एक कीमत है।_...

  • मेढ़

    डर स्वेच्छा से बनाया हुआ वो धागा है जो हमेंशर्म और झिझक से बाँधता है।मुझे गाँव प...

उल्टाआप By कमल चोपड़ा

                            उल्टा आप                          कमल चोपड़ा  ​                 लड़की को मास्टर जी के घर से निकलते देखकर देखने वालों की आँखों से आग की लपटें निकलने लगी थ...

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मेरे समाज में ऐसा क्यों होता हैं - भाग 1 By Std Maurya

भाग -1. लेखक -एसटीडी मौर्य कटनी मध्य प्रदेश भारत मोबाईल न. 7648959825 हमारा समाज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ रूढ़िवादिता और अंधविश्वास का खौफ इस कदर फैल गया है कि लोग इससे बाहर...

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ऐसे ही क्यों होता हैं? - 1 By Std Maurya

लेखक: एसटीडी मौर्य️,कटनी मध्य प्रदेश मोबाइल नंबर -7648959825​एक दिन मैं लिख रहा था कि 'मोहब्बत सभी को मिलती है', तभी अचानक मेरी कलम की नोक (निब) टूट गई। वह मुझसे कहने लगी—...

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खुदकुशी By कमल चोपड़ा

खुदकुशी                      कमल चोपड़ा        ​रातभर तेज़ आंधी के साथ बरसात और ओले उन दोनों के दिलो-दिमाग पर हथगोलों की तरह गिर रहे थे। रह-रहकर सतवंत सिंह खेत पर जाने के लिये उठ ख...

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मैं हो रहा हूॅं By kunal kumar

कहते है जीवित बचे रहना बहुत बड़ी बात है पर कोई ये नहीं जानता उसकी भी एक कीमत है।___________________________“तू फिर उसी पेड़ के पास बैठा है?” माँ ने पूछा। लड़का मुस्कुराया नहीं।बस धी...

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लिव-इन By कमल चोपड़ा

लिव-इन                           कमल चोपड़ा                                ​अरुण उसे रास्ते में अचानक मिल गया था। पहले वह एक ऑफिस में उसके साथ ही काम करता था। इधर-उधर की बातों के ब...

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चंगुल By कमल चोपड़ा

चंगुल                            कमल चोपड़ा                        ​लड़की का चेहरा नहीं दिखाया गया था। धुंधले अक्स और आवाज़ के ज़रिए ही माँ-बाबूजी ने पहचान लिया था। उन्होंने कभी सो...

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एक डिवोर्स ऐसा भी - 3 By Alka Aggarwal

(जब बेटी ने प्यार को समझा)समय बीत गया।आर्या अब 22 साल की हो चुकी थी।कॉलेज खत्म हो गया था।और वह बिल्कुल अपनी माँ की तरह दिल से जीने वाली लड़की बन चुकी थी।नैना उसे देखती तो मुस्कुरात...

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शान्ति शान्ति By कमल चोपड़ा

                            ​शान्ति शान्ति                                                        कमल चोपड़ा                      ​                             उसके नुचे हुए पंख, घ...

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मेढ़ By kunal kumar

डर स्वेच्छा से बनाया हुआ वो धागा है जो हमेंशर्म और झिझक से बाँधता है।मुझे गाँव पसंद है पर मैं डरता हूँ उनकी सोच से,रीति-रिवाज से, कुंठित विचार से।हालाँकि गाँव में डर हवा की तरह नही...

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बिना अलविदा के By InkImagination

बिना अलविदा केकभी-कभी जिंदगी में वो पल आते हैं, जब आप फोन पर स्क्रॉल कर रहे होते हैं, और अचानक एक मैसेज आता है। वो मैसेज जो बस एक सिम्पल "हाय" होता है, लेकिन आपकी पूरी शाम बदल देता...

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जबरदस्ती गले पड़ना By Rajeev kumar

कितनी भी व्यस्तता हो, चाहे सांस लेने की फूरसत भी न मिले, मगर थोड़ी सी मानसिक फुरसत मिलने पर भला किसका मन एकबारगी अपने बचपन को याद करने में नहीं जाता होगा। और तब जब बचपन को कोई साथी...

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रंगीन यादें By Radhika

होली! एक ऐसा त्यौहार जो रंगों की छटा से सबकी बेरंग दुनिया को रंगीन बना देती। यह एक ऐसा त्यौहार है जो नई शुरुआत का संदेश देता है। इस समय सारे दुश्मन भी एक हो जाते हैं और "बुरा न मान...

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मंडी में रामदीन By कमल चोपड़ा

​मंडी में रामदीन                            कमल चोपड़ा                                ​गाड़ी में तरबूज भरे हुए थे। माल देखकर शामलाल दलाल छलांग मारकर गाड़ी से नीचे उतरा। रामदीन से ब...

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बदलाव By Rajeev kumar

बदलाव ’’ क्या बनेगी मुनिया, किसी की दुल्हन? क्या करेगी मुनिया, किसी के घर का चैका-बरतन? ’’ मुनिया जब भी पढ़ने के लिए बैठती तो उसकी दादी व्यंग्य वाण चलाते हुए कहती। मुनिया अपनी किताब...

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स्वर्णा By Pallavi

बारिश की बूँदें स्टेशन की पुरानी छत से टपक रही थीं। प्लेटफॉर्म पर लगी पीली लाइटें गीली ज़मीन पर अजीब सी चमक पैदा कर रही थीं। हवा में ठंडक थी, और भीड़ में भी एक अजीब सा सन्नाटा। इसी...

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चीनू की मौत By manshi

चीनू एक भोली भाली लड़की है। वह आठवीं कक्षा की छात्रा है। कुछ ही दिनों पहले उसके पिता का स्थानांतरण हुआ था। जिसकी वजह से वे गाँव से शहर आए थे। चीनू का असली नाम चाँदनी है, लोग उसे प्...

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सिंगापुर में फांसी By Devendra Kumar

मेरी बेटी अपर्णा सिंगापुर में कोई बीस वर्ष से रह रही है अतः यहाँ हर वर्ष आना होता रहता है, मेरे देखते देखते यह सुन्दर से और सुन्दर होता जा रहा है. पहले तो हम जानते थे कि इतनी हरिया...

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अमरूद का पेड़ By Adarsh Pal Adarsh

‎घनश्याम त्रिपाठी का जीवन हर सुख से पूर्ण था। आज्ञाकारी बच्चे और पत्नी भी मृदुभाषिणी थी। धन-सम्पदा में भी कोई कमी न थी। 50 बीघे खेत, बड़ा घर व बाज़ार में कई दुकानें चलती थीं। लेकिन...

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सुरक्षा-छत्र By Rinki Singh

गर्मी की दोपहर पूरे उन्माद पर थी। बाज़ार की चहल-पहल धीमी पड़ चुकी थी। श्यामा अपनी कपड़ों की दुकान के काउंटर पर बैठी थी। सामने शीशे के पार सड़क पर धूप बिखरी थी, पर उसके भीतर जैसे बर...

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नीलू और नीला तारा By Makvana Bhavek

  धनपुर की सुबह : धनपुर की सुबह धूल और आदतों से बनी होती है। सूरज निकलने से पहले ही गलियों में झाड़ू की सरसराहट, चूल्हों की खटखट और अधखुली नींद की खाँसी तैरने लगती है। नीलू इन्हीं...

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सूरज की किरण: माँ का अहसास By kajal jha

माँ की आखिरी चिट्ठी: एक अमर बलिदानगाँव की वह पुरानी हवेलीनुमा घर, जिसकी दीवारों से चूना झड़ रहा था, आज अजीब सी खामोशी ओढ़े हुए थी। बाहर सावन की झड़ी लगी थी। बादलों की गर्जना और खिड़की...

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Hug Day By Devang Kori

Hi दोस्तों,आज Hug Day है… तो एक किस्सा share करना चाहता हूं...College के 2 साल हम साथ गुज़रे। दोस्त थे, बातें होती थीं, हंसी-मज़ाक होता था। पर वो extrovert थी — full-on energy, सब...

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एक जासूसी लेखक की मुकम्मल जिंदगी की दास्तान By Dr Sandip Awasthi

आलोचना : एक जासूसी लेखक की मुकम्मल जिंदगी की दास्तान :  आत्मकथा: पानी केरा बुदबुदा  __________________________आत्मकथाएं कुछ बुरी होती हैं,कुछ काल्पनिक उपन्यास सी,कुछ झूठ...

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दुहाई- तिहाई By Deepak sharma

                  “धर्मवीर,” अपनी अर्द्धचेतना में जाई मुझे ठीक पहचान न पाईं। समझीं, मैं यशवीर नहीं हूं। धर्मवीर हूं।  ...

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अधूरे सपने By Unknown writer

यह कहानी एक चिड़िया की है।एक छोटी-सी, नन्ही-सी और बहुत ही प्यारी चिड़िया।पूरे जंगल में उससे अधिक सुंदर चिड़िया न किसी ने कभी देखी थी और न ही उसके बारे में सुना था। उसकी आँखों में च...

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अधूरापन By Anup Anand

1बरसात की वह शाम न तो बहुत ख़ुशनुमा थी, न ही बहुत उदास।बस एक अजीब-सी चुप्पी थी—जैसे आसमान कुछ कहना चाहता हो, लेकिन शब्द नहीं मिल रहे हों।नीरज बरामदे में खड़ा था। सामने सड़क पर पानी...

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बिश्नोई धर्म पर आधारित कहानी - बिश्नोई धर्म By Prithvi Nokwal

बिश्नोई जीवन का एक अनमोल रत्न है, जहाँ हर साँस प्रकृति के साथ ताल मिलाती है। यह कहानी राजस्थान के थार मरुस्थल की रेत में बसी एक छोटी-सी बस्ती से शुरू होती है, जहाँ बिश्नोई धर्म के...

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नेहरू फाइल्स - भूल-121 By Rachel Abraham

भूल-121 डॉ. श्यामा प्रसाद मुकर्जी के प्रति दुर्व्यवहार डॉ. श्यामा प्रसाद मुकर्जी (1901-1953) सर आशुतोष मुखर्जी (1864-1924) के पुत्र थे, जो ‘बंगलार बाघ’ या ‘टाइगर अ‍ॉफ बंगाल’ के नाम...

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नारद जी और धर्म राज युधिष्ठिर का संवाद By Prithvi Nokwal

इन्द्रप्रस्थ की सभा उस दिन विशेष रूप से सजी हुई थी। राजसूय यज्ञ के बाद पांडवों का यश चारों दिशाओं में फैल चुका था। राजमहल के प्रांगण में सुवर्ण स्तंभ चमक रहे थे, सुगंधित धूप की महक...

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लिव इन का रिश्ता। By Jeetendra

"चाय में चीनी कम है, या शायद आज मेरा ही मूड ठीक नहीं," माधव ने खिड़की के बाहर उड़ते कबूतरों को देखते हुए कहा।प्रेरणा ने बालकनी की रेलिंग पर रखे अपने मग को देखा, फिर माधव को। "चाय त...

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गहराइयों में तुम By Ashin Rishi

शीर्षक: “गहराइयों में तुम”                                                                          कभी-कभी प्यार सतह पर नहीं, दिल की सबसे गहरी परतों में मिलता है…      दिल्ली की

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पहली मुलाक़ात - 1 By puja

Apisode -1)बारिश हो रही थी काव्य कॉलेज के बाहर खड़ी थी‍️, गाड़ी खराब हो गई थी !तभी आरव नें पुरानी साइकिल रोक !"अगर बुरा ना मानो....तो मैं छोड़ दूं ? " आराम ने धीरे से पूछा ! काव्या...

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हम फिर भी मिलेंगे By Ashin Rishi

                                                                                 शीर्षक: "हम फिर भी मिलेंगे"                                                                      एक...

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भीष्मपितामह और धर्मराज युधिष्ठिर का संवाद By Prithvi Nokwal

कुरुक्षेत्र का महायुद्ध समाप्त हो चुका था। अठारह दिनों तक पृथ्वी ने जिस भयानक रक्तपात को देखा था, उसके बाद अब मैदान में केवल सन्नाटा था। टूटी रथों की ध्वनियाँ, बिखरे अस्त्र-शस्त्र,...

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यक्ष और युधिष्ठिर का संवाद! By Prithvi Nokwal

वन के घने अंधकार में, जहां सूरज की किरणें भी मुश्किल से छनकर आती थीं, पांडवों का वनवास अपने चरम पर पहुंच चुका था। बारह वर्ष की कठिन यात्रा के बाद, वे अब अज्ञातवास की तैयारी में थे।...

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बेटे की चाह By Jeetendra

ड्राइंग रूम के पुराने सोफे पर बैठी सुमित्रा देवी अपनी उंगलियों में फंसी माला को बड़ी तेजी से फेर रही थीं। कमरे में अगरबत्ती का धुआं किसी भारी कोहरे की तरह तैर रहा था। नेहा रसोई में...

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पहचान की धुंध By kajal jha

शीर्षक: अनाम अहसाससब कुछ एक 'गलत नंबर' से शुरू हुआ था। आर्यन ने अपने दोस्त को फोन लगाया था, लेकिन दूसरी तरफ से एक सौम्य और ठहरी हुई आवाज़ आई— "हेलो?"वह आवाज़ मीरा की थी। उस ए...

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विदुर नीति संवाद - विदुर और धृतराष्ट्र के बीच By Prithvi Nokwal

विदुर नीति संवाद – विदुर और धृतराष्ट्र के बीचमहाभारत केवल एक युद्धकथा नहीं है, बल्कि यह जीवन, धर्म, राजनीति, समाज और मानव स्वभाव का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करने वाला महाग्रंथ है। इसम...

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शांति प्रस्ताव से पहले द्रोपदी और श्री कृष्ण संवाद By Prithvi Nokwal

शांति प्रस्ताव से पहले द्रौपदी और श्रीकृष्ण संवाद(महाभारत प्रसंग पर आधारित विस्तृत संवाद)उपप्लव्य नगरी में पांडवों का शिविर लगा हुआ था। वनवास और अज्ञातवास की कठिन परीक्षाओं के बाद...

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पुरानी हेवेली का प्रेम By kajal jha

पुरानी हवेली का प्रेम: एक अधूरी दास्तानपहाड़ों की तलहटी में बसी वह पुरानी हवेली सालों से वीरान पड़ी थी। लोग कहते थे कि उस हवेली की दीवारों में दर्द और चीखें दफन हैं। शहर की भागदौड़ स...

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उल्टाआप By कमल चोपड़ा

                            उल्टा आप                          कमल चोपड़ा  ​                 लड़की को मास्टर जी के घर से निकलते देखकर देखने वालों की आँखों से आग की लपटें निकलने लगी थ...

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मेरे समाज में ऐसा क्यों होता हैं - भाग 1 By Std Maurya

भाग -1. लेखक -एसटीडी मौर्य कटनी मध्य प्रदेश भारत मोबाईल न. 7648959825 हमारा समाज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ रूढ़िवादिता और अंधविश्वास का खौफ इस कदर फैल गया है कि लोग इससे बाहर...

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ऐसे ही क्यों होता हैं? - 1 By Std Maurya

लेखक: एसटीडी मौर्य️,कटनी मध्य प्रदेश मोबाइल नंबर -7648959825​एक दिन मैं लिख रहा था कि 'मोहब्बत सभी को मिलती है', तभी अचानक मेरी कलम की नोक (निब) टूट गई। वह मुझसे कहने लगी—...

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खुदकुशी By कमल चोपड़ा

खुदकुशी                      कमल चोपड़ा        ​रातभर तेज़ आंधी के साथ बरसात और ओले उन दोनों के दिलो-दिमाग पर हथगोलों की तरह गिर रहे थे। रह-रहकर सतवंत सिंह खेत पर जाने के लिये उठ ख...

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मैं हो रहा हूॅं By kunal kumar

कहते है जीवित बचे रहना बहुत बड़ी बात है पर कोई ये नहीं जानता उसकी भी एक कीमत है।___________________________“तू फिर उसी पेड़ के पास बैठा है?” माँ ने पूछा। लड़का मुस्कुराया नहीं।बस धी...

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लिव-इन By कमल चोपड़ा

लिव-इन                           कमल चोपड़ा                                ​अरुण उसे रास्ते में अचानक मिल गया था। पहले वह एक ऑफिस में उसके साथ ही काम करता था। इधर-उधर की बातों के ब...

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चंगुल By कमल चोपड़ा

चंगुल                            कमल चोपड़ा                        ​लड़की का चेहरा नहीं दिखाया गया था। धुंधले अक्स और आवाज़ के ज़रिए ही माँ-बाबूजी ने पहचान लिया था। उन्होंने कभी सो...

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एक डिवोर्स ऐसा भी - 3 By Alka Aggarwal

(जब बेटी ने प्यार को समझा)समय बीत गया।आर्या अब 22 साल की हो चुकी थी।कॉलेज खत्म हो गया था।और वह बिल्कुल अपनी माँ की तरह दिल से जीने वाली लड़की बन चुकी थी।नैना उसे देखती तो मुस्कुरात...

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शान्ति शान्ति By कमल चोपड़ा

                            ​शान्ति शान्ति                                                        कमल चोपड़ा                      ​                             उसके नुचे हुए पंख, घ...

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मेढ़ By kunal kumar

डर स्वेच्छा से बनाया हुआ वो धागा है जो हमेंशर्म और झिझक से बाँधता है।मुझे गाँव पसंद है पर मैं डरता हूँ उनकी सोच से,रीति-रिवाज से, कुंठित विचार से।हालाँकि गाँव में डर हवा की तरह नही...

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बिना अलविदा के By InkImagination

बिना अलविदा केकभी-कभी जिंदगी में वो पल आते हैं, जब आप फोन पर स्क्रॉल कर रहे होते हैं, और अचानक एक मैसेज आता है। वो मैसेज जो बस एक सिम्पल "हाय" होता है, लेकिन आपकी पूरी शाम बदल देता...

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जबरदस्ती गले पड़ना By Rajeev kumar

कितनी भी व्यस्तता हो, चाहे सांस लेने की फूरसत भी न मिले, मगर थोड़ी सी मानसिक फुरसत मिलने पर भला किसका मन एकबारगी अपने बचपन को याद करने में नहीं जाता होगा। और तब जब बचपन को कोई साथी...

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रंगीन यादें By Radhika

होली! एक ऐसा त्यौहार जो रंगों की छटा से सबकी बेरंग दुनिया को रंगीन बना देती। यह एक ऐसा त्यौहार है जो नई शुरुआत का संदेश देता है। इस समय सारे दुश्मन भी एक हो जाते हैं और "बुरा न मान...

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मंडी में रामदीन By कमल चोपड़ा

​मंडी में रामदीन                            कमल चोपड़ा                                ​गाड़ी में तरबूज भरे हुए थे। माल देखकर शामलाल दलाल छलांग मारकर गाड़ी से नीचे उतरा। रामदीन से ब...

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बदलाव By Rajeev kumar

बदलाव ’’ क्या बनेगी मुनिया, किसी की दुल्हन? क्या करेगी मुनिया, किसी के घर का चैका-बरतन? ’’ मुनिया जब भी पढ़ने के लिए बैठती तो उसकी दादी व्यंग्य वाण चलाते हुए कहती। मुनिया अपनी किताब...

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स्वर्णा By Pallavi

बारिश की बूँदें स्टेशन की पुरानी छत से टपक रही थीं। प्लेटफॉर्म पर लगी पीली लाइटें गीली ज़मीन पर अजीब सी चमक पैदा कर रही थीं। हवा में ठंडक थी, और भीड़ में भी एक अजीब सा सन्नाटा। इसी...

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चीनू की मौत By manshi

चीनू एक भोली भाली लड़की है। वह आठवीं कक्षा की छात्रा है। कुछ ही दिनों पहले उसके पिता का स्थानांतरण हुआ था। जिसकी वजह से वे गाँव से शहर आए थे। चीनू का असली नाम चाँदनी है, लोग उसे प्...

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सिंगापुर में फांसी By Devendra Kumar

मेरी बेटी अपर्णा सिंगापुर में कोई बीस वर्ष से रह रही है अतः यहाँ हर वर्ष आना होता रहता है, मेरे देखते देखते यह सुन्दर से और सुन्दर होता जा रहा है. पहले तो हम जानते थे कि इतनी हरिया...

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अमरूद का पेड़ By Adarsh Pal Adarsh

‎घनश्याम त्रिपाठी का जीवन हर सुख से पूर्ण था। आज्ञाकारी बच्चे और पत्नी भी मृदुभाषिणी थी। धन-सम्पदा में भी कोई कमी न थी। 50 बीघे खेत, बड़ा घर व बाज़ार में कई दुकानें चलती थीं। लेकिन...

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सुरक्षा-छत्र By Rinki Singh

गर्मी की दोपहर पूरे उन्माद पर थी। बाज़ार की चहल-पहल धीमी पड़ चुकी थी। श्यामा अपनी कपड़ों की दुकान के काउंटर पर बैठी थी। सामने शीशे के पार सड़क पर धूप बिखरी थी, पर उसके भीतर जैसे बर...

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नीलू और नीला तारा By Makvana Bhavek

  धनपुर की सुबह : धनपुर की सुबह धूल और आदतों से बनी होती है। सूरज निकलने से पहले ही गलियों में झाड़ू की सरसराहट, चूल्हों की खटखट और अधखुली नींद की खाँसी तैरने लगती है। नीलू इन्हीं...

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सूरज की किरण: माँ का अहसास By kajal jha

माँ की आखिरी चिट्ठी: एक अमर बलिदानगाँव की वह पुरानी हवेलीनुमा घर, जिसकी दीवारों से चूना झड़ रहा था, आज अजीब सी खामोशी ओढ़े हुए थी। बाहर सावन की झड़ी लगी थी। बादलों की गर्जना और खिड़की...

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Hug Day By Devang Kori

Hi दोस्तों,आज Hug Day है… तो एक किस्सा share करना चाहता हूं...College के 2 साल हम साथ गुज़रे। दोस्त थे, बातें होती थीं, हंसी-मज़ाक होता था। पर वो extrovert थी — full-on energy, सब...

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एक जासूसी लेखक की मुकम्मल जिंदगी की दास्तान By Dr Sandip Awasthi

आलोचना : एक जासूसी लेखक की मुकम्मल जिंदगी की दास्तान :  आत्मकथा: पानी केरा बुदबुदा  __________________________आत्मकथाएं कुछ बुरी होती हैं,कुछ काल्पनिक उपन्यास सी,कुछ झूठ...

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दुहाई- तिहाई By Deepak sharma

                  “धर्मवीर,” अपनी अर्द्धचेतना में जाई मुझे ठीक पहचान न पाईं। समझीं, मैं यशवीर नहीं हूं। धर्मवीर हूं।  ...

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अधूरे सपने By Unknown writer

यह कहानी एक चिड़िया की है।एक छोटी-सी, नन्ही-सी और बहुत ही प्यारी चिड़िया।पूरे जंगल में उससे अधिक सुंदर चिड़िया न किसी ने कभी देखी थी और न ही उसके बारे में सुना था। उसकी आँखों में च...

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अधूरापन By Anup Anand

1बरसात की वह शाम न तो बहुत ख़ुशनुमा थी, न ही बहुत उदास।बस एक अजीब-सी चुप्पी थी—जैसे आसमान कुछ कहना चाहता हो, लेकिन शब्द नहीं मिल रहे हों।नीरज बरामदे में खड़ा था। सामने सड़क पर पानी...

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बिश्नोई धर्म पर आधारित कहानी - बिश्नोई धर्म By Prithvi Nokwal

बिश्नोई जीवन का एक अनमोल रत्न है, जहाँ हर साँस प्रकृति के साथ ताल मिलाती है। यह कहानी राजस्थान के थार मरुस्थल की रेत में बसी एक छोटी-सी बस्ती से शुरू होती है, जहाँ बिश्नोई धर्म के...

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नेहरू फाइल्स - भूल-121 By Rachel Abraham

भूल-121 डॉ. श्यामा प्रसाद मुकर्जी के प्रति दुर्व्यवहार डॉ. श्यामा प्रसाद मुकर्जी (1901-1953) सर आशुतोष मुखर्जी (1864-1924) के पुत्र थे, जो ‘बंगलार बाघ’ या ‘टाइगर अ‍ॉफ बंगाल’ के नाम...

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नारद जी और धर्म राज युधिष्ठिर का संवाद By Prithvi Nokwal

इन्द्रप्रस्थ की सभा उस दिन विशेष रूप से सजी हुई थी। राजसूय यज्ञ के बाद पांडवों का यश चारों दिशाओं में फैल चुका था। राजमहल के प्रांगण में सुवर्ण स्तंभ चमक रहे थे, सुगंधित धूप की महक...

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लिव इन का रिश्ता। By Jeetendra

"चाय में चीनी कम है, या शायद आज मेरा ही मूड ठीक नहीं," माधव ने खिड़की के बाहर उड़ते कबूतरों को देखते हुए कहा।प्रेरणा ने बालकनी की रेलिंग पर रखे अपने मग को देखा, फिर माधव को। "चाय त...

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गहराइयों में तुम By Ashin Rishi

शीर्षक: “गहराइयों में तुम”                                                                          कभी-कभी प्यार सतह पर नहीं, दिल की सबसे गहरी परतों में मिलता है…      दिल्ली की

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पहली मुलाक़ात - 1 By puja

Apisode -1)बारिश हो रही थी काव्य कॉलेज के बाहर खड़ी थी‍️, गाड़ी खराब हो गई थी !तभी आरव नें पुरानी साइकिल रोक !"अगर बुरा ना मानो....तो मैं छोड़ दूं ? " आराम ने धीरे से पूछा ! काव्या...

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हम फिर भी मिलेंगे By Ashin Rishi

                                                                                 शीर्षक: "हम फिर भी मिलेंगे"                                                                      एक...

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भीष्मपितामह और धर्मराज युधिष्ठिर का संवाद By Prithvi Nokwal

कुरुक्षेत्र का महायुद्ध समाप्त हो चुका था। अठारह दिनों तक पृथ्वी ने जिस भयानक रक्तपात को देखा था, उसके बाद अब मैदान में केवल सन्नाटा था। टूटी रथों की ध्वनियाँ, बिखरे अस्त्र-शस्त्र,...

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यक्ष और युधिष्ठिर का संवाद! By Prithvi Nokwal

वन के घने अंधकार में, जहां सूरज की किरणें भी मुश्किल से छनकर आती थीं, पांडवों का वनवास अपने चरम पर पहुंच चुका था। बारह वर्ष की कठिन यात्रा के बाद, वे अब अज्ञातवास की तैयारी में थे।...

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बेटे की चाह By Jeetendra

ड्राइंग रूम के पुराने सोफे पर बैठी सुमित्रा देवी अपनी उंगलियों में फंसी माला को बड़ी तेजी से फेर रही थीं। कमरे में अगरबत्ती का धुआं किसी भारी कोहरे की तरह तैर रहा था। नेहा रसोई में...

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पहचान की धुंध By kajal jha

शीर्षक: अनाम अहसाससब कुछ एक 'गलत नंबर' से शुरू हुआ था। आर्यन ने अपने दोस्त को फोन लगाया था, लेकिन दूसरी तरफ से एक सौम्य और ठहरी हुई आवाज़ आई— "हेलो?"वह आवाज़ मीरा की थी। उस ए...

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विदुर नीति संवाद - विदुर और धृतराष्ट्र के बीच By Prithvi Nokwal

विदुर नीति संवाद – विदुर और धृतराष्ट्र के बीचमहाभारत केवल एक युद्धकथा नहीं है, बल्कि यह जीवन, धर्म, राजनीति, समाज और मानव स्वभाव का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करने वाला महाग्रंथ है। इसम...

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शांति प्रस्ताव से पहले द्रोपदी और श्री कृष्ण संवाद By Prithvi Nokwal

शांति प्रस्ताव से पहले द्रौपदी और श्रीकृष्ण संवाद(महाभारत प्रसंग पर आधारित विस्तृत संवाद)उपप्लव्य नगरी में पांडवों का शिविर लगा हुआ था। वनवास और अज्ञातवास की कठिन परीक्षाओं के बाद...

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पुरानी हेवेली का प्रेम By kajal jha

पुरानी हवेली का प्रेम: एक अधूरी दास्तानपहाड़ों की तलहटी में बसी वह पुरानी हवेली सालों से वीरान पड़ी थी। लोग कहते थे कि उस हवेली की दीवारों में दर्द और चीखें दफन हैं। शहर की भागदौड़ स...

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