hindi Best Short Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


Languages
Categories
Featured Books
  • गंगा की पुकार

    गंगा की पुकार(“यह एक सच्ची घटना पर आधारित चेतावनी है, कोई काल्पनिक कहानी नहीं।”)...

  • नीरव आस

    नीरव आसरात के ठीक दो बजे थे। मोबाइल की तीखी घंटी ने सन्नाटे को ऐसे चीर दिया जैसे...

  • अधूरी सी दोस्ती... पूरी सी कहानी

    चैप्टर: “वो दोस्त जो दिल के बहुत पास था”कॉलेज का पहला दिन था…हर तरफ नए चेहरे, नई...

कारखाना By राज बोहरे

कहानी: कारखाना    “आप अगर मेरा साथ दोगे तो मैं अपने कारखाने को मिला इतना बड़ा ऑर्डर स्वीकार कर पाऊंगा… नहीं तो मैं मना कर देता हूँ।” तरुण भल्ला की आवाज़ में एक अजीब-सी सधी हुई नरमी...

Read Free

खलनायक By Ramesh Desai

                           खलनायक ??  रंजन कुमार देसाई                                 कल उस ने दोबारा ख़ुदकुशी करने का प्रयास किया था. उस वजह से भरत समेत कोई रात को सो नहीं पाया था...

Read Free

घर लौटती पगडंडी By राज बोहरे

कहानी: घर लौटती पगडंडी मचान पर खड़ा ज्ञान सिंह दूर तक फैले खेत को देख रहा था। गेहूं की सुनहरी फसल अब कटकर ढेरों में बदल चुकी थी। हवा में भूसे की हल्की गंध तैर रही थी। उसने आंखें मि...

Read Free

जड़ें By राज बोहरे

जड़ें  सावित्री देवी अक्सर खिड़की के पास बैठ जातीं। बाहर लगे नीम के पेड़ को देखतीं और सोचतीं— “जैसे इस पेड़ की जड़ें मिट्टी से जुड़ी हैं, वैसे ही इंसान की जड़ें उसके परिवार से जुड़...

Read Free

गंगा की पुकार By Shivraj Bhokare

गंगा की पुकार(“यह एक सच्ची घटना पर आधारित चेतावनी है, कोई काल्पनिक कहानी नहीं।”)भाइयों और बहनों,ज़रा ठहरकर सोचिए। एक 86 साल का वृद्ध। कोई साधारण व्यक्ति नहीं—आईआईटी कानपुर का पूर्व...

Read Free

हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया By Devendra Kumar

हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया उस दिन लोधी रोड श्मशान घाट में खाकी वर्दी में बहुत लोग उपस्थित थे, विद्युत् शवदाह अर्थात  इलेक्ट्रिक क्रेमेटोरियम के पास ही एक तरफ दो बिगुलर भी चुपच...

Read Free

सेंध By राज बोहरे

                                              सेंध धूप की एक धार मंदिर के अधबने प्रांगण में तिरछी कटती हुई गिर रही थी। हवा में महीन धूल तैर रही थी—इतनी हल्की कि दिखती नहीं, पर सांस...

Read Free

इन गुड फ़ेथ By Deepak sharma

                   सन उन्नीस सौ उनसठ के उस दिन किशोर अपने पैतृक गांव से लौटा था।जहां वह दसवीं की अपनी परीक्षा के बाद हुई लंबी छुट्...

Read Free

कर्ज़ By राज बोहरे

                                                           कर्ज़ हेड क्लर्क नागर ने अपनी मेज़ पर रखी पीतल की पुरानी घंटी को उँगलियों से दो बार थपथपाया—“टन्… टन्…”। दफ्तर की दीवारों...

Read Free

डर By राज बोहरे

                                                          डर   शाम उतर रही थी—धीरे-धीरे, जैसे किसी बूढ़े लेखक की कलम थककर कागज़ पर रेंग रही हो। दफ्तर की घड़ी ने पाँच बजाए, और दिनेश...

Read Free

टूटकर भी मुस्कुराती रही By aakanksha

पूर्वांचल के एक छोटे से गाँव में नंदिनी रहती थी—मिट्टी के घर, कच्ची गलियाँ और सपनों से भरी आँखें। घर में गरीबी थी, लेकिन उसके इरादे बहुत अमीर थे। माँ अक्सर कहतीं—“बेटी, जिंदगी आसान...

Read Free

डायरी का वो आखरी पन्ना - 4 By Std Maurya

मैंने हल्के गुस्से और मज़ाकिया अंदाज़ में कहा,“अभी जाकर शिकायत कर ले, चुड़ैल।”अंकिता भी पीछे हटने वाली कहाँ थी, वह तुरंत बोली,“अभी तो बोलोगे ही, जब घर से दूर हो तो।”मैंने हँसते हुए...

Read Free

आपदधर्म By Deepak sharma

आपदधर्म                    “चरण- स्पर्श, ताऊजी,” बाहर के बरामदे से बहू की आवाज़ मेरे कमरे तक चली आई।    &nbsp...

Read Free

कुछ रिश्ते खत्म होकर भी… By Makvana Bhavek

रात के 11 बजे थे। शहर की सड़कों पर सन्नाटा धीरे-धीरे फैल रहा था। स्ट्रीट लाइट्स की पीली रोशनी सड़क पर लंबी परछाइयाँ बना रही थी।   एक आदमी बेचैनी से सड़क किनारे टहल रहा था। उसके हाथ...

Read Free

नीरव आस By राजनारायण बोहरे

नीरव आसरात के ठीक दो बजे थे। मोबाइल की तीखी घंटी ने सन्नाटे को ऐसे चीर दिया जैसे किसी शांत तालाब में अचानक पत्थर फेंक दिया गया हो। चंपा की नींद हड़बड़ा कर खुली। आँखें आधी खुली थीं,...

Read Free

अधूरी सी दोस्ती... पूरी सी कहानी By Piyu soul

चैप्टर: “वो दोस्त जो दिल के बहुत पास था”कॉलेज का पहला दिन था…हर तरफ नए चेहरे, नई आवाज़ें, नई शुरुआत की हलचल थी। उसी भीड़ में एक लड़की खड़ी थी—आर्या। हाथ में फाइल, चेहरे पर हल्की सी...

Read Free

परछाईं By राजनारायण बोहरे

परछाइयाँअसीर उस दिन चौके के कोने में बैठा थाली को ऐसे घूर रहा था जैसे उसमें रोटी नहीं, कोई सवाल रखा हो—जिसका जवाब उसके पास नहीं है। दाल की सतह पर जमी पतली-सी परत बार-बार काँप जाती,...

Read Free

बोधिवृक्ष और हम By Std Maurya

प्रियांशी की नींद अचानक टूटी, वह हड़बड़ाकर जागी और घबराते हुए बोली, "अरे... क्या हुआ?"​अंकिता ने चुटकी लेते हुए मज़ाक किया, "कुछ नहीं हुआ... बस सुबह हो गई है! अब उठ भी जाओ... जो एक...

Read Free

सच और झूठ के मध्य By Alok Mishra

उमेश अब पीठ से हाथ सामने ले आया और धीरे से उभारों को सहलाने लगा ।  कमरा शांत था उमा ने घबरा कर आंखें बंद कर ली ।

Read Free

2:30 Am By Neha kariyaal

सब लोग है यहां बस मैं ही नहीं हूं क्योंकि हम human being कम और Deta points ज्यादा लगते हैं।हम सबका अधिकतर समय screen पर गुजरता है, हम सब पास तो हैं पर साथ कोई नहीं। तो कभी कभी लगता...

Read Free

मौन से जागरण तक By Anant Dhish Aman

एक गाँव था—छोटा, शांत और अपनी सहजता में अद्भुत।सुबह की पहली किरण जब कच्ची गलियों को छूती, तो लगता जैसे प्रकृति स्वयं वहाँ आशीर्वाद बनकर उतर आई हो।वहाँ की मिट्टी में विश्वास की गंध...

Read Free

समय का सौदागर। By Jeetendra

शहर के पुराने हिस्से में एक बहुत छोटी-सी घड़ी की दुकान थी। बाहर से देखने पर वह दुकान किसी साधारण, भुला दिए गए कोने जैसी लगती थी। धूल से ढकी कांच की खिड़की, दीवारों पर पीतल की पुरान...

Read Free

देट वूमेन By Pankaj Modak

देट वूमेन [शॉर्ट स्टोरी]एक स्त्री जिसकी शादी कुछ वर्षों पहले हुई। शादी से पहले वह स्कूल गई थी। होली का दिन था। एक लड़का लाल सिंदूर उसके माथे पर लगा देता है और भाग जाता है। परिवारवा...

Read Free

खुलासा By Deepak sharma

                 “मां ने बैंंक में अपना खाता कब खोला?” मां की स्मृतियों में से एक नई कड़ी मैं ने खोलनी चाही। उनकी मृत्यु के...

Read Free

नेता जी By Rajeev kumar

उन्होंने वाणी को विराम देना ही आवश्यक समझा। उन्होंने अपने ही जवाब से कई सवाल खड़े कर दिए थे। अपनी मानसिकता छुपाने के चक्कर में छुपी हुई मानसिकता को उन्होंने उजागर कर दिया था। विकास...

Read Free

अभी भी कहीं ज़िंदा है ज़मीर By Rakesh Kaul

अभी भी कहीं ज़िंदा है ज़मीर आज जब मैं पीछे मुड़ कर देखती हूँ तो यक़ीन ही नहीं होता कि मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार की वही मासूम सी छोटी लड़की गोमती हूँ जो कभी अकेले बाज़ार जाने से भी हिचकिच...

Read Free

वो दोस्त… जो याद बन गया By Angel

शुरू करने से पहले एक शेर याद आता है।ऐसे रिश्तों के लिए, जिनकी कोई परिभाषा नहीं होती—Gulzar“दिल में कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं,जिनका नाम नहीं होता…पर एहसास उनकी मौजूदगी काहर वक्त हो...

Read Free

चकरी गिरह By Deepak sharma

                   “आप को प्रिंसीपल साहिबा ने याद किया है,मैडम,” कस्बापुर के राजकीय  महिला डिग्री कालेज का एक चपर...

Read Free

और एक प्रयास By Rajeev kumar

’’ हालात से समझौता सभी करते हैं, मगर पापा, मैं हालात से कुछ वर्ष और लड़ना चाहता हूं, जुझना चाहता हूं मुश्किलों से। हमको मालूम है कि आप जो भी कह रहे हैं अपने अनुभव के आधार पर ही कह र...

Read Free

चाचा एन.आर.आई. By Makvana Bhavek

अहमदाबाद की एक तंग लेकिन जिंदादिल गली में शाम ढल रही थी। नुक्कड़ की चाय की दुकान पर भाप से ज्यादा अफवाहें उड़ रही थीं। प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठा गौरव पटेल अपनी किस्मत को कोस रहा...

Read Free

नियति (नसीब) :एक सत्य घटना पर आधारित By pink lotus

    ​लोग कहते हैं नसीब खराब है... पर सच तो कुछ और ही है।​हम सब कहते हैं कि "मेरा नसीब खराब है," "मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है?" लेकिन रियलिटी पता है क्या है? नियति (Destiny) तुम्ह...

Read Free

ऐसे बूढ़े बैल को कौन बांध भुस देत By Devendra Kumar

ऐसे बूढ़े बैल को कौन बांध भुस दे उपरोक्त देशी कहावत मैंने दो अवसरों पर सुनी थी, दोनों अलग सन्दर्भ थे अलग अलग तरह लोगों के मुंह से इसे सुना था. पहली बार तो कहावत बूढ़े गौ पुत्र वृषभ क...

Read Free

निशानी By कमल चोपड़ा

​निशानी                                    कमल चोपड़ा     ​सात आठ दिन ऊपर हो गये थे। वह माँ बनने वाली है जब वह यह खबर अपने पति को देगी तो वह भी खुशी से झूम उठेगा। लेकिन यह 'गुड...

Read Free

कहानी में छुपी एक सन्देश - 1 By Std Maurya

लेखक -एसटीडी मौर्य कटनी मध्य प्रदेश मोबाईल न. 7648959825यह कहानी पूर्ण रूप से सत्य है। इसमें कोई काल्पनिक बातें नहीं हैं, बल्कि इसे सच्चाई के रंगों से सजाया गया है। यह घटना आज से ल...

Read Free

वो कौन थी By S Sinha

                                                                               वो कौन थी       तपन घोष  और मैंने एक साथ एक जहाज कंपनी में नौकरी ज्वाइन किया था  . दोनों ने  कंपनी के...

Read Free

राजा दाहिर सेन - सिंध की धरती का अंतिम हिंदू सम्राट By Chintansinh Jadav

राजा दाहिर सेन – सिंध की धरती का अंतिम हिंदू सम्राटभारत के इतिहास में कई ऐसे वीर योद्धा हुए हैं जिनकी गाथाएँ समय के साथ धुंधली पड़ गईं। उन्हीं में से एक थे राजा दाहिर — सिंध प्रदेश...

Read Free

ऐसे ही क्यों होता हैं? - 2 By Std Maurya

लेखक -एसटीडी मौर्य दूरभाष -917648959825  2 मार्च 2026यह कुछ ही दिन पुरानी बात है। मैं अक्सर सोशल मीडिया पर दो-चार लाइनें लिखकर पोस्ट किया करता हूँ, जो लोगों को काफी पसंद आती हैं। ए...

Read Free

एक सपना क्या हो पाएगा अपना? By Rishav raj

उत्तर भारत के एक छोटे से गाँव सीतामढ़ी के पास बसे एक साधारण से गाँव में एक लड़का रहता था — उसका नाम था आरव। गाँव बहुत छोटा था, कच्ची सड़कें, मिट्टी के घर, और चारों तरफ खेत। वहाँ के...

Read Free

मेरे समाज में ऐसा क्यों होता हैं - भाग 1 By Std Maurya

भाग -1. लेखक -एसटीडी मौर्य कटनी मध्य प्रदेश भारत मोबाईल न. 7648959825 हमारा समाज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ रूढ़िवादिता और अंधविश्वास का खौफ इस कदर फैल गया है कि लोग इससे बाहर...

Read Free

उल्टाआप By कमल चोपड़ा

                            उल्टा आप                          कमल चोपड़ा  ​                 लड़की को मास्टर जी के घर से निकलते देखकर देखने वालों की आँखों से आग की लपटें निकलने लगी थ...

Read Free

खुदकुशी By कमल चोपड़ा

खुदकुशी                      कमल चोपड़ा        ​रातभर तेज़ आंधी के साथ बरसात और ओले उन दोनों के दिलो-दिमाग पर हथगोलों की तरह गिर रहे थे। रह-रहकर सतवंत सिंह खेत पर जाने के लिये उठ ख...

Read Free

लिव-इन By कमल चोपड़ा

लिव-इन                           कमल चोपड़ा                                ​अरुण उसे रास्ते में अचानक मिल गया था। पहले वह एक ऑफिस में उसके साथ ही काम करता था। इधर-उधर की बातों के ब...

Read Free

मैं हो रहा हूॅं By kunal kumar

कहते है जीवित बचे रहना बहुत बड़ी बात है पर कोई ये नहीं जानता उसकी भी एक कीमत है।___________________________“तू फिर उसी पेड़ के पास बैठा है?” माँ ने पूछा। लड़का मुस्कुराया नहीं।बस धी...

Read Free

एक डिवोर्स ऐसा भी - 3 By Alka Aggarwal

(जब बेटी ने प्यार को समझा)समय बीत गया।आर्या अब 22 साल की हो चुकी थी।कॉलेज खत्म हो गया था।और वह बिल्कुल अपनी माँ की तरह दिल से जीने वाली लड़की बन चुकी थी।नैना उसे देखती तो मुस्कुरात...

Read Free

चंगुल By कमल चोपड़ा

चंगुल                            कमल चोपड़ा                        ​लड़की का चेहरा नहीं दिखाया गया था। धुंधले अक्स और आवाज़ के ज़रिए ही माँ-बाबूजी ने पहचान लिया था। उन्होंने कभी सो...

Read Free

मेढ़ By kunal kumar

डर स्वेच्छा से बनाया हुआ वो धागा है जो हमेंशर्म और झिझक से बाँधता है।मुझे गाँव पसंद है पर मैं डरता हूँ उनकी सोच से,रीति-रिवाज से, कुंठित विचार से।हालाँकि गाँव में डर हवा की तरह नही...

Read Free

शान्ति शान्ति By कमल चोपड़ा

                            ​शान्ति शान्ति                                                        कमल चोपड़ा                      ​                             उसके नुचे हुए पंख, घ...

Read Free

जबरदस्ती गले पड़ना By Rajeev kumar

कितनी भी व्यस्तता हो, चाहे सांस लेने की फूरसत भी न मिले, मगर थोड़ी सी मानसिक फुरसत मिलने पर भला किसका मन एकबारगी अपने बचपन को याद करने में नहीं जाता होगा। और तब जब बचपन को कोई साथी...

Read Free

रंगीन यादें By Radhika

होली! एक ऐसा त्यौहार जो रंगों की छटा से सबकी बेरंग दुनिया को रंगीन बना देती। यह एक ऐसा त्यौहार है जो नई शुरुआत का संदेश देता है। इस समय सारे दुश्मन भी एक हो जाते हैं और "बुरा न मान...

Read Free

कारखाना By राज बोहरे

कहानी: कारखाना    “आप अगर मेरा साथ दोगे तो मैं अपने कारखाने को मिला इतना बड़ा ऑर्डर स्वीकार कर पाऊंगा… नहीं तो मैं मना कर देता हूँ।” तरुण भल्ला की आवाज़ में एक अजीब-सी सधी हुई नरमी...

Read Free

खलनायक By Ramesh Desai

                           खलनायक ??  रंजन कुमार देसाई                                 कल उस ने दोबारा ख़ुदकुशी करने का प्रयास किया था. उस वजह से भरत समेत कोई रात को सो नहीं पाया था...

Read Free

घर लौटती पगडंडी By राज बोहरे

कहानी: घर लौटती पगडंडी मचान पर खड़ा ज्ञान सिंह दूर तक फैले खेत को देख रहा था। गेहूं की सुनहरी फसल अब कटकर ढेरों में बदल चुकी थी। हवा में भूसे की हल्की गंध तैर रही थी। उसने आंखें मि...

Read Free

जड़ें By राज बोहरे

जड़ें  सावित्री देवी अक्सर खिड़की के पास बैठ जातीं। बाहर लगे नीम के पेड़ को देखतीं और सोचतीं— “जैसे इस पेड़ की जड़ें मिट्टी से जुड़ी हैं, वैसे ही इंसान की जड़ें उसके परिवार से जुड़...

Read Free

गंगा की पुकार By Shivraj Bhokare

गंगा की पुकार(“यह एक सच्ची घटना पर आधारित चेतावनी है, कोई काल्पनिक कहानी नहीं।”)भाइयों और बहनों,ज़रा ठहरकर सोचिए। एक 86 साल का वृद्ध। कोई साधारण व्यक्ति नहीं—आईआईटी कानपुर का पूर्व...

Read Free

हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया By Devendra Kumar

हमको ओढ़ावे चदरिया अब चलती बिरया उस दिन लोधी रोड श्मशान घाट में खाकी वर्दी में बहुत लोग उपस्थित थे, विद्युत् शवदाह अर्थात  इलेक्ट्रिक क्रेमेटोरियम के पास ही एक तरफ दो बिगुलर भी चुपच...

Read Free

सेंध By राज बोहरे

                                              सेंध धूप की एक धार मंदिर के अधबने प्रांगण में तिरछी कटती हुई गिर रही थी। हवा में महीन धूल तैर रही थी—इतनी हल्की कि दिखती नहीं, पर सांस...

Read Free

इन गुड फ़ेथ By Deepak sharma

                   सन उन्नीस सौ उनसठ के उस दिन किशोर अपने पैतृक गांव से लौटा था।जहां वह दसवीं की अपनी परीक्षा के बाद हुई लंबी छुट्...

Read Free

कर्ज़ By राज बोहरे

                                                           कर्ज़ हेड क्लर्क नागर ने अपनी मेज़ पर रखी पीतल की पुरानी घंटी को उँगलियों से दो बार थपथपाया—“टन्… टन्…”। दफ्तर की दीवारों...

Read Free

डर By राज बोहरे

                                                          डर   शाम उतर रही थी—धीरे-धीरे, जैसे किसी बूढ़े लेखक की कलम थककर कागज़ पर रेंग रही हो। दफ्तर की घड़ी ने पाँच बजाए, और दिनेश...

Read Free

टूटकर भी मुस्कुराती रही By aakanksha

पूर्वांचल के एक छोटे से गाँव में नंदिनी रहती थी—मिट्टी के घर, कच्ची गलियाँ और सपनों से भरी आँखें। घर में गरीबी थी, लेकिन उसके इरादे बहुत अमीर थे। माँ अक्सर कहतीं—“बेटी, जिंदगी आसान...

Read Free

डायरी का वो आखरी पन्ना - 4 By Std Maurya

मैंने हल्के गुस्से और मज़ाकिया अंदाज़ में कहा,“अभी जाकर शिकायत कर ले, चुड़ैल।”अंकिता भी पीछे हटने वाली कहाँ थी, वह तुरंत बोली,“अभी तो बोलोगे ही, जब घर से दूर हो तो।”मैंने हँसते हुए...

Read Free

आपदधर्म By Deepak sharma

आपदधर्म                    “चरण- स्पर्श, ताऊजी,” बाहर के बरामदे से बहू की आवाज़ मेरे कमरे तक चली आई।    &nbsp...

Read Free

कुछ रिश्ते खत्म होकर भी… By Makvana Bhavek

रात के 11 बजे थे। शहर की सड़कों पर सन्नाटा धीरे-धीरे फैल रहा था। स्ट्रीट लाइट्स की पीली रोशनी सड़क पर लंबी परछाइयाँ बना रही थी।   एक आदमी बेचैनी से सड़क किनारे टहल रहा था। उसके हाथ...

Read Free

नीरव आस By राजनारायण बोहरे

नीरव आसरात के ठीक दो बजे थे। मोबाइल की तीखी घंटी ने सन्नाटे को ऐसे चीर दिया जैसे किसी शांत तालाब में अचानक पत्थर फेंक दिया गया हो। चंपा की नींद हड़बड़ा कर खुली। आँखें आधी खुली थीं,...

Read Free

अधूरी सी दोस्ती... पूरी सी कहानी By Piyu soul

चैप्टर: “वो दोस्त जो दिल के बहुत पास था”कॉलेज का पहला दिन था…हर तरफ नए चेहरे, नई आवाज़ें, नई शुरुआत की हलचल थी। उसी भीड़ में एक लड़की खड़ी थी—आर्या। हाथ में फाइल, चेहरे पर हल्की सी...

Read Free

परछाईं By राजनारायण बोहरे

परछाइयाँअसीर उस दिन चौके के कोने में बैठा थाली को ऐसे घूर रहा था जैसे उसमें रोटी नहीं, कोई सवाल रखा हो—जिसका जवाब उसके पास नहीं है। दाल की सतह पर जमी पतली-सी परत बार-बार काँप जाती,...

Read Free

बोधिवृक्ष और हम By Std Maurya

प्रियांशी की नींद अचानक टूटी, वह हड़बड़ाकर जागी और घबराते हुए बोली, "अरे... क्या हुआ?"​अंकिता ने चुटकी लेते हुए मज़ाक किया, "कुछ नहीं हुआ... बस सुबह हो गई है! अब उठ भी जाओ... जो एक...

Read Free

सच और झूठ के मध्य By Alok Mishra

उमेश अब पीठ से हाथ सामने ले आया और धीरे से उभारों को सहलाने लगा ।  कमरा शांत था उमा ने घबरा कर आंखें बंद कर ली ।

Read Free

2:30 Am By Neha kariyaal

सब लोग है यहां बस मैं ही नहीं हूं क्योंकि हम human being कम और Deta points ज्यादा लगते हैं।हम सबका अधिकतर समय screen पर गुजरता है, हम सब पास तो हैं पर साथ कोई नहीं। तो कभी कभी लगता...

Read Free

मौन से जागरण तक By Anant Dhish Aman

एक गाँव था—छोटा, शांत और अपनी सहजता में अद्भुत।सुबह की पहली किरण जब कच्ची गलियों को छूती, तो लगता जैसे प्रकृति स्वयं वहाँ आशीर्वाद बनकर उतर आई हो।वहाँ की मिट्टी में विश्वास की गंध...

Read Free

समय का सौदागर। By Jeetendra

शहर के पुराने हिस्से में एक बहुत छोटी-सी घड़ी की दुकान थी। बाहर से देखने पर वह दुकान किसी साधारण, भुला दिए गए कोने जैसी लगती थी। धूल से ढकी कांच की खिड़की, दीवारों पर पीतल की पुरान...

Read Free

देट वूमेन By Pankaj Modak

देट वूमेन [शॉर्ट स्टोरी]एक स्त्री जिसकी शादी कुछ वर्षों पहले हुई। शादी से पहले वह स्कूल गई थी। होली का दिन था। एक लड़का लाल सिंदूर उसके माथे पर लगा देता है और भाग जाता है। परिवारवा...

Read Free

खुलासा By Deepak sharma

                 “मां ने बैंंक में अपना खाता कब खोला?” मां की स्मृतियों में से एक नई कड़ी मैं ने खोलनी चाही। उनकी मृत्यु के...

Read Free

नेता जी By Rajeev kumar

उन्होंने वाणी को विराम देना ही आवश्यक समझा। उन्होंने अपने ही जवाब से कई सवाल खड़े कर दिए थे। अपनी मानसिकता छुपाने के चक्कर में छुपी हुई मानसिकता को उन्होंने उजागर कर दिया था। विकास...

Read Free

अभी भी कहीं ज़िंदा है ज़मीर By Rakesh Kaul

अभी भी कहीं ज़िंदा है ज़मीर आज जब मैं पीछे मुड़ कर देखती हूँ तो यक़ीन ही नहीं होता कि मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार की वही मासूम सी छोटी लड़की गोमती हूँ जो कभी अकेले बाज़ार जाने से भी हिचकिच...

Read Free

वो दोस्त… जो याद बन गया By Angel

शुरू करने से पहले एक शेर याद आता है।ऐसे रिश्तों के लिए, जिनकी कोई परिभाषा नहीं होती—Gulzar“दिल में कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं,जिनका नाम नहीं होता…पर एहसास उनकी मौजूदगी काहर वक्त हो...

Read Free

चकरी गिरह By Deepak sharma

                   “आप को प्रिंसीपल साहिबा ने याद किया है,मैडम,” कस्बापुर के राजकीय  महिला डिग्री कालेज का एक चपर...

Read Free

और एक प्रयास By Rajeev kumar

’’ हालात से समझौता सभी करते हैं, मगर पापा, मैं हालात से कुछ वर्ष और लड़ना चाहता हूं, जुझना चाहता हूं मुश्किलों से। हमको मालूम है कि आप जो भी कह रहे हैं अपने अनुभव के आधार पर ही कह र...

Read Free

चाचा एन.आर.आई. By Makvana Bhavek

अहमदाबाद की एक तंग लेकिन जिंदादिल गली में शाम ढल रही थी। नुक्कड़ की चाय की दुकान पर भाप से ज्यादा अफवाहें उड़ रही थीं। प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठा गौरव पटेल अपनी किस्मत को कोस रहा...

Read Free

नियति (नसीब) :एक सत्य घटना पर आधारित By pink lotus

    ​लोग कहते हैं नसीब खराब है... पर सच तो कुछ और ही है।​हम सब कहते हैं कि "मेरा नसीब खराब है," "मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है?" लेकिन रियलिटी पता है क्या है? नियति (Destiny) तुम्ह...

Read Free

ऐसे बूढ़े बैल को कौन बांध भुस देत By Devendra Kumar

ऐसे बूढ़े बैल को कौन बांध भुस दे उपरोक्त देशी कहावत मैंने दो अवसरों पर सुनी थी, दोनों अलग सन्दर्भ थे अलग अलग तरह लोगों के मुंह से इसे सुना था. पहली बार तो कहावत बूढ़े गौ पुत्र वृषभ क...

Read Free

निशानी By कमल चोपड़ा

​निशानी                                    कमल चोपड़ा     ​सात आठ दिन ऊपर हो गये थे। वह माँ बनने वाली है जब वह यह खबर अपने पति को देगी तो वह भी खुशी से झूम उठेगा। लेकिन यह 'गुड...

Read Free

कहानी में छुपी एक सन्देश - 1 By Std Maurya

लेखक -एसटीडी मौर्य कटनी मध्य प्रदेश मोबाईल न. 7648959825यह कहानी पूर्ण रूप से सत्य है। इसमें कोई काल्पनिक बातें नहीं हैं, बल्कि इसे सच्चाई के रंगों से सजाया गया है। यह घटना आज से ल...

Read Free

वो कौन थी By S Sinha

                                                                               वो कौन थी       तपन घोष  और मैंने एक साथ एक जहाज कंपनी में नौकरी ज्वाइन किया था  . दोनों ने  कंपनी के...

Read Free

राजा दाहिर सेन - सिंध की धरती का अंतिम हिंदू सम्राट By Chintansinh Jadav

राजा दाहिर सेन – सिंध की धरती का अंतिम हिंदू सम्राटभारत के इतिहास में कई ऐसे वीर योद्धा हुए हैं जिनकी गाथाएँ समय के साथ धुंधली पड़ गईं। उन्हीं में से एक थे राजा दाहिर — सिंध प्रदेश...

Read Free

ऐसे ही क्यों होता हैं? - 2 By Std Maurya

लेखक -एसटीडी मौर्य दूरभाष -917648959825  2 मार्च 2026यह कुछ ही दिन पुरानी बात है। मैं अक्सर सोशल मीडिया पर दो-चार लाइनें लिखकर पोस्ट किया करता हूँ, जो लोगों को काफी पसंद आती हैं। ए...

Read Free

एक सपना क्या हो पाएगा अपना? By Rishav raj

उत्तर भारत के एक छोटे से गाँव सीतामढ़ी के पास बसे एक साधारण से गाँव में एक लड़का रहता था — उसका नाम था आरव। गाँव बहुत छोटा था, कच्ची सड़कें, मिट्टी के घर, और चारों तरफ खेत। वहाँ के...

Read Free

मेरे समाज में ऐसा क्यों होता हैं - भाग 1 By Std Maurya

भाग -1. लेखक -एसटीडी मौर्य कटनी मध्य प्रदेश भारत मोबाईल न. 7648959825 हमारा समाज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ रूढ़िवादिता और अंधविश्वास का खौफ इस कदर फैल गया है कि लोग इससे बाहर...

Read Free

उल्टाआप By कमल चोपड़ा

                            उल्टा आप                          कमल चोपड़ा  ​                 लड़की को मास्टर जी के घर से निकलते देखकर देखने वालों की आँखों से आग की लपटें निकलने लगी थ...

Read Free

खुदकुशी By कमल चोपड़ा

खुदकुशी                      कमल चोपड़ा        ​रातभर तेज़ आंधी के साथ बरसात और ओले उन दोनों के दिलो-दिमाग पर हथगोलों की तरह गिर रहे थे। रह-रहकर सतवंत सिंह खेत पर जाने के लिये उठ ख...

Read Free

लिव-इन By कमल चोपड़ा

लिव-इन                           कमल चोपड़ा                                ​अरुण उसे रास्ते में अचानक मिल गया था। पहले वह एक ऑफिस में उसके साथ ही काम करता था। इधर-उधर की बातों के ब...

Read Free

मैं हो रहा हूॅं By kunal kumar

कहते है जीवित बचे रहना बहुत बड़ी बात है पर कोई ये नहीं जानता उसकी भी एक कीमत है।___________________________“तू फिर उसी पेड़ के पास बैठा है?” माँ ने पूछा। लड़का मुस्कुराया नहीं।बस धी...

Read Free

एक डिवोर्स ऐसा भी - 3 By Alka Aggarwal

(जब बेटी ने प्यार को समझा)समय बीत गया।आर्या अब 22 साल की हो चुकी थी।कॉलेज खत्म हो गया था।और वह बिल्कुल अपनी माँ की तरह दिल से जीने वाली लड़की बन चुकी थी।नैना उसे देखती तो मुस्कुरात...

Read Free

चंगुल By कमल चोपड़ा

चंगुल                            कमल चोपड़ा                        ​लड़की का चेहरा नहीं दिखाया गया था। धुंधले अक्स और आवाज़ के ज़रिए ही माँ-बाबूजी ने पहचान लिया था। उन्होंने कभी सो...

Read Free

मेढ़ By kunal kumar

डर स्वेच्छा से बनाया हुआ वो धागा है जो हमेंशर्म और झिझक से बाँधता है।मुझे गाँव पसंद है पर मैं डरता हूँ उनकी सोच से,रीति-रिवाज से, कुंठित विचार से।हालाँकि गाँव में डर हवा की तरह नही...

Read Free

शान्ति शान्ति By कमल चोपड़ा

                            ​शान्ति शान्ति                                                        कमल चोपड़ा                      ​                             उसके नुचे हुए पंख, घ...

Read Free

जबरदस्ती गले पड़ना By Rajeev kumar

कितनी भी व्यस्तता हो, चाहे सांस लेने की फूरसत भी न मिले, मगर थोड़ी सी मानसिक फुरसत मिलने पर भला किसका मन एकबारगी अपने बचपन को याद करने में नहीं जाता होगा। और तब जब बचपन को कोई साथी...

Read Free

रंगीन यादें By Radhika

होली! एक ऐसा त्यौहार जो रंगों की छटा से सबकी बेरंग दुनिया को रंगीन बना देती। यह एक ऐसा त्यौहार है जो नई शुरुआत का संदेश देता है। इस समय सारे दुश्मन भी एक हो जाते हैं और "बुरा न मान...

Read Free